Thursday, 29 September 2016

जिंदगी

जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।

चलते चलते गिरना है गिर के भी संभालना है। 
संभल के खुद को तुझे अपनी राह चलना है। 
राह चलते चलते तू खुद का भी सम्भाल कर। । 
जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।

राह में चलते चलते अनेको समस्या आएगी 
ओ तुझको तुम्हारी अच्छाइसे चुरायेंगी 
उन बुराईओका तुम डटकर मुकाबला कर। 
जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।

न हो कोई साथ तेरे तो कभी न कर फ़िकर। 
तू स्वयं एक सूर्य हो तो फिर तुझे है किससे डर। 
हर एक विजय को तुम स्वमं प्रकाशमान कर। 
जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।

न रुकना हे न थमना हे इस बड़े तूफान में। 
दिखा दे तू अपना हुनर इस खामोश जहाँ में। 
हुनर की अपने तू हमेशा ही कर कदर। 
जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।

न खुदको तू दूसरोंकी छाओ में कर खड़ा। 
स्वयं के छोटे पैरो पर ही होना है अब बड़ा। 
बड़ा होकर भी कभी पैरो को जमी से निकाल। 
जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।

-Sachin