जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।
चलते चलते गिरना है गिर के भी संभालना है।
संभल के खुद को तुझे अपनी राह चलना है।
राह चलते चलते तू खुद का भी सम्भाल कर। ।
राह में चलते चलते अनेको समस्या आएगी
ओ तुझको तुम्हारी अच्छाइसे चुरायेंगी
उन बुराईओका तुम डटकर मुकाबला कर।
जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।
न हो कोई साथ तेरे तो कभी न कर फ़िकर।
तू स्वयं एक सूर्य हो तो फिर तुझे है किससे डर।
हर एक विजय को तुम स्वमं प्रकाशमान कर।
जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।
न रुकना हे न थमना हे इस बड़े तूफान में।
दिखा दे तू अपना हुनर इस खामोश जहाँ में।
हुनर की अपने तू हमेशा ही कर कदर।
जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।
न खुदको तू दूसरोंकी छाओ में कर खड़ा।
स्वयं के छोटे पैरो पर ही होना है अब बड़ा।
बड़ा होकर भी कभी पैरो को जमी से निकाल।
जिंदगी की रहो में तू खुद को भी तलाश कर।
-Sachin

Superb!
ReplyDeleteThe glory of your envisioned future! 👍
Superb.. :)
ReplyDeleteAti Sundar.
ReplyDeleteAti Sundar.
ReplyDeleteExcellent....
ReplyDeleteExcellent....
ReplyDeleteचरम सीमा पे...!!! (End is excellent...!!!)
ReplyDeleteVery Well Written..
ReplyDeleteलाजवाब
ReplyDeleteलाजवाब
ReplyDeleteउच्च, खुप सुंदर लिहलय
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